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Sunday, February 1, 2026
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अमर व्यक्तित्व केर मिथिला-मैथिलीक विकासमे अछि अटल कृतित्व :छठम पुण्यतिथि (16 अगस्त) पर विशेष -प्रवीण कुमार झा

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गांधीजी अपन एकटा आलेखमे जीवनक साध्य ओ साधनक मादे लिखने छथि जे व्यक्तिक जीवनक साध्य ओ साधन दुनू पवित्र हेबाक चाही। जीवनक लक्ष्य जे किछु निर्धारित करी, तकरा प्राप्तिक मार्ग सेहो सत्य, अहिंसा आ सद्भावक आधारे पर हेबाक चाही । एहिसँ जे साध्य प्राप्त होइछ से मूल्यवान आ नैसर्गिक संतोष प्रदान करऽवला होइत अछि।
एहि निष्कर्ष पर जखन हम पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयीकें देखैत छियनि तऽ बुझना जाइत अछि जे ई महामानव शत-प्रतिशत एहि विचार कँ अपनामे समाहित कयने छलाह । आदर्शवादक सीमा रेखाक ई कहियो उल्लंघन नहि केलाह आ राजनीति हिनका लेल समाज सेवाक माध्यम मात्र छल, कोनो व्यक्तिगत हित साधनक कोनो लक्ष्य हिनक मोनमे मिसियो भरि नहि रहनि । इएह कारण छल जे अटलजी दलगत राजनीतिसँ ऊपर उठि सर्वमान्य ओ सर्वकालिक नेता प्रमाणित भेलाह । वास्तव मे अटल बिहारी वाजपेयी एकगोट एहन व्यक्तित्वक परिचायक छथि जे भारतीय राजनीतिक इतिहासमे अपन अमिट छाप छोड़लनि। पचास बरखक संसदीय राजनीति कयनिहार एहि महापुरूषक नाम भारतीय इतिहास मे सदा सर्वदा अमर रहत। एकगोट पार्टीक गठन आ तकरा दू सँ लऽ कऽ सरकार गठन धरिक अंकधरि पहुँचेबाक काज कयनिहार, टूटैत सरकारक बचेबासँ लऽ कऽ जनताक समर्थन पयबाक विश्वास स्थापित करब, कोनो साधारण बात नहि अछि। मुदा अटल जीक अटल व्यक्तित्व सँ ई सभ किछु संभव छल आ संभव भेल। एहिमे कनिको किनको संदेह नहि जे वाजपेयी जी लोकतंत्रक भाल पर अपन विजयक खिस्सा स्वयं लिखलाह।
वाजपेयी जी भारतक प्रधानमंत्री बनबाक पश्चात मैथिली आ मिथिलाक विकासक लेल कतेको एहेन निर्णय कयलनि जे ऐतिहासिक अछि । 16 अगस्त 2003 सँ आजुक तिथि धरि गणतंत्र दिवसक पूर्व संध्या पर महामहिम राष्ट्रपतिक अभिभाषणक मैथिली आनुवाद आ 15 अगस्त कें भारतक प्रधानमंत्रीक राष्ट्रक नामकेर संदेशक मैथिली अनुवादक ई पूर्व पीढ़ीक छल। दरभंगा आकाशवाणी सँ मैथिली समाचारक आरंभ भेल। हिनकर सदप्रयास छल जे संपूर्ण मिथिला मे कतोक दशक सँ मैथिली कें संविधानक आठम अनुसूची मे शामिल करबाक आंदोलनकें ठौर भेटल आ 22 दिसम्बर 2003 कें भारत सरकार द्वारा मैथिली कें संविधानक आठम अनुसूची मे शामिल कएल गेल । ताहि दिन सँ 22-23 दिसम्बरक युगल तिथि समस्त मैथिल समुदाय मे मैथिली अधिकार दिवस यानी अंतराष्ट्रीय मैथिली सम्मेलनक रूप मे मनाओल जा रहल अछि। अन्तराष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन मे मिथिला रत्न से अलंकृत करबाक परंपरा आरंभ भेल । एहि अलंकरणक खासियत अछि जे जाहि प्रांत मे अंतर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलनक आयोजन होइछ ओहिठामक साहित्यकार आ संस्कृति कर्मी कें सेहो मिथिला रत्न अलंकरण लेल चयनित कएल जाइत अछि। मुदा अटल बिहारी वाजपेयी जखन 2003 ई में कोसी पुलक शिलान्यासक क्रममे मैथिली कें संविधानक आठम अनुसूची मे शामिल करबाक घोषणा कएने छलाह, ओकर भावभूमि हुनकर मानस पटल पर 1967 ई० सँ अंकित छल, जखन तत्कालीन सरकार मे शामिल जनसंघ पार्टी दिस सँ बिहारक द्वितीय राजभाषाक रूप मे उर्दू केर स्थान पर मैथिली कें समर्थन देल गेल छल । जे मिथिला मिहिरक संपादक पदमनारायण झा विरंची आ देवेन्द्र पाठक सँ साक्षात्कार मे अटलजी कें जवाब आलेख के प्रारंभ मे उद्धत अछि। एहि साक्षात्कार मे ओ सिंधी भाषा कें साहित्य अकादमी सँ मान्यता देबाक सवाल पर बाजल छलाह- ‘मैथिली निश्चित रूप सँ सिंधी सँ श्रेष्ठ साहित्यक संरक्षक अछि आ ई भाषा एक गोट व्यापक क्षेत्रक अभिव्यक्तिक माध्यम अछि, जखन कि सिंधी कोनो क्षेत्र विशेषक अधिकारिणी नहि रहली।’ मिथिला मिहिरक 18 मई 1975 केर अंक मे प्रकाशित एहि साक्षात्कार मे 47 वर्ष पूर्व ओ आगाँ कहैत छथि- अहाँ लोकनि एहि बात के नोट करू जे मैथिली के अविलम्ब संविधानक आठम अनुसूची मे स्थान भेटबाक चाही। ई हमर मांग अछि। हमरा दलक मांग अछि। 1975 मे वाजपेयी जीक मैथिलीक प्रति जे सदविचार छल 2003 आबैत ओ फलीभूत भेल। मैथिलीक अभियानी आ आंदोलनकारी लोकनि जखन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सँ भेंट कऽ सभटा आवश्यक प्रमाण सँ हुनका लैस कऽ देलखिन, कविहृदय प्रधानमंत्रीक आदेश जारी भऽ गेल आ मैथिली संविधानक आठम अनुसूची मे शामिल भऽ गेल। एकर बाद एहि आंदोलन केँ ठौर भेटल। मुदा, अलग मिथिला राज्यक संघर्ष एखनहुं धरि जारी अछि । मुदा, जहिना मैथिली आंदोलनक एकटा पैघ आयाम मैथिली भाषा कें संवैधानिक भाषाक रूप मे भारत सरकारक मान्यता प्राप्त करबामे कतेको मापदंड पर सफल भेनाई जरूरी छल। कतेको रास प्रमाण इकट्ठा करबा मे कते डिबिया तेल जरल, ताहिना अलग मिथिला राज्यक निर्माणक लड़ाई मे एखन मीलो-मील चलबाक अछि । एहि रास्तालेल एकटा अनिवार्यता अछि इन्फ्रास्ट्रक्चरक कोनो भू-भागक समुचित विकास आ तकर जनसंख्या में एकता लेल ओहिठामक संपर्क क्षमताक मजबूत होयब । 1934 केर भूकंप मे कोसी पुल ध्वस्त भेल छल। एहि कारणे मिथिला दू भाग में विभक्त भऽ गेल। दरभंगा आ सहरसा – स्थापित मिथिला सांस्कृतिक केन्द्र आपस मे 12 घंटा सँ बेसी यात्रा दूरी पर अवस्थित भऽ गेल छल। एहि दूरीक कारणे अंगिका, बज्जिका सभक क्षुद्र राजनीतिक कुकुरमुत्ता सभ उगय लागल। मुदा, धन्य अटल बिहारी वाजपेयी जी जे हिनकर बनाओल स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क योजनाक पूरब-पश्चिम काॅरिडोर केर सड़कक उद्घाटन जखन 2012 मे भेल, दूनू मिथिला पुनः एक भऽ गेल। आजुक दिन इस्ट-वेस्ट काॅरिडोर मे राष्ट्रीय उच्चपथ 57 संपूर्ण मिथिला केर विकास मे अद्भुत भूमिका निमाहि रहल अछि। आब दरभंगा सँ पूर्णिया चारि घंटा दूर मात्र। विकासक एहि प्रतिमानक सर्जक छलाह अटल बिहारी वाजपेयीजी। आब मिथिलाक आर्थिक प्रगति एहि सड़क केर निर्माणक पश्चात तेज गति पकड़ि लेलक अछि । खेती आ रोजगारक नव नव प्रतिमान नित बनि रहल अछि।भपटियाहि-निर्मली रेल लाइनक आरंभ भेला सँ देश आ आन प्रदेश सभ सँ मिथिलाक संपर्क आओर बेसी प्रगाढ़ बनि रहल। कोसी महासेतुक निर्माण सँ मिथिला के देशक राजधानी सं सीधा सम्पर्क रेल माध्यम सँ भेने एकर पैघ आ विस्तृत प्रभाव मिथिलाक परिसीमन पर पड़ि रहल। संगहि कतेको रास विवादास्पद भूमि ओ सीमा विवादक समाधान संभव भऽ रहल। ई कहब अतिश्योक्ति नहि जे मैथिली-मिथिलाक जतेक अभियानी छथि, हुनका लेल भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी प्रेरणाक ओ प्रकाशपुंज छथि जे अलग मिथिला राज्यक निर्माणक मार्ग प्रशस्त करबा मे सेहो सहायक होइछ । ईहो कम महत्वपूर्ण नहि जे जखन 1975 मे अपन साक्षात्कार दैत मिथिला मिहिर मे छपल आलेख पढ़वा मे हुनका कठिनाई भेलनि, आ बजलाह- हमरा मैथिली बृझवा मे दिक्कत होइत अछि, मुदा सभ किछु बूझि जाइत छी। साक्षात्कार लेनिहार कहलथिन ई मैथिली अछि। वाजपेयी जी ठहाका मारि बजलाह- हम कहाँ कहि रहल छी जे मैथिली हिन्दी थिक । वास्तव मे मैथिली मैथिलए छी।
मिथिला मैथिली केर उत्थानक लेल समर्पित कवि हृदय वाजपेयी जीक कालजयी उपलब्धि, रचनात्मक कार्य, आस्तिक निष्ठा, तपोवनी तेजस्विता, साधना आ सार्थक सांस्कृतिकता सँ अन्यान्य राष्ट्रीय आ विश्व मंच सँ भारत कें गौरवान्वित कएनिहार एहन व्यक्तित्व छलाह जे दुनिया कें भारतीयता आ एकर गौरवशाली अस्मिता सँ परिचय करेबा मे डेग डेग पर सफल भेलाह । निस्संदेह, सेवा आ सम्मानक परम्परा सँ झलकैत एकटा करूण आ सुकोमल व्यक्तित्व, एकटा निरीह आ नागरिक दायित्वक आत्म संहिता सँ संपुष्ट व्यक्तित्व केहन दुर्लभ होइत अछि, अटल जीक रूप मे एकरा सहजहि गूनल जा सकैछ ।
एकटा समन्वित व्यक्तित्वक विशालता सँ समुन्नत अटल जी अपना जीवनक शुरूआती दौर सँ कोनो पद अथवा सत्ता सुख केर मोहताज़ नहि रहलाह। हाँ, ई सब किछु यदि स्वयं हुनका धरि चलि कऽ आओल तऽ ओकर अवहेलना सेहो नहि कएलनि। ई कहब जरूरी नहि जे अटल जी कँ पद सँ बेसी चिंता ओहि मूल्यक रहल, जाहि लेल ओ अनेक भूमिका निमाहैत रहलाह। यद्यपि देशक राजनीति अनेक करवट लैत रहल आ एहि मे मूल्य आ चरित्रक संग-संग संपूर्ण विश्वक परिदृश्य बदलि गेल तथापि अटल जी सदैव अपन आदर्श, विचार, सिद्धांत आ राष्ट्रीय सरोकारक प्रति जीवन पर्यन्त सचेत आ अडिग रहलाह। ओ राजनीति मे सेहो योग्यता, प्रतिभा, दक्षता आ राष्ट्रभक्तिक सशक्त पक्षधर छलाह। भारतीय राजनीति मे एहि गुणक प्रति उपेक्षाभाव आ उदासीनताक प्रवृति सँ हुनका निराशा आ चिंता होइत छलनि। हुनक मानब छल जे अहं उपेक्षाभाव कँ जन्म दैत अछि आ एहि सँ विद्वेषभाव एवं संकीर्ण राजनीति उत्साहित होइत अछि। वरिष्ठ लोक जेहन आचरण करैत छथि, ओहने आचरण सामान्य जनता करय लगैत अछि आ आगू चलि एहि तरहक आचरण कर परिपाटी बनि जाइत अछि ।
देखल जाय तऽ मानवीय संवेदना सँ भरल पूरल अटल जी मे अजीब सन गुरूत्वाकर्षण छलन्हि। इएह कारण छल जे हुनक स्पष्टवादिता, ईमानदारी, कुशल वक्तृत्व आ वैचारिकता मे समाविष्ट जीवनक दर्शन आमजन संग विशिष्ट जन कें सेहो सदैव आकर्षित करैत रहल। हुनक उपस्थिति मात्र सँ वातावरण मे अद्भुत उर्जाक संचार भऽ जाइत छल । अटल जी सत्यावलोकन, गंभीरता, चिन्तनशीलता, मुखरता आ प्रतिपादन शैलीक अद्भुत समुच्चय छलाह । सत्य सँ इनकार नहि आ मिथ्या सँ समझौता नहि, हुनकर इएह व्यक्तित्व हुनका लेल पृथक स्थान निर्धारित करैत छल। ओ दोसराक पाड़ल डाँढ़ि कें छोट करबा सँ बेसी समय आ शक्ति अपन डाँढ़ि के पैघ करबा मे लगबैत छलाह। ओ हिसाब बैसाके संबंध बनोनिहार कथमपि नहि छलाह। ओ कतियायल जा चुकल लोक कें अपनयबाक कला मे माहिर छलाह । एकटा करगर आ विश्वसनीयता बला निस्सन व्यक्तित्व। कहल गेल बात सँ हाथ नहि खीचव आ अपन तर्क अथवा विचार लेल दोसरक आजादी नहि छीनब, हिनक मुख्य गुण छलनि ।
आत्मीयताक सागर अटल जी मे अद्भुत समायोजन शक्ति छलनि। ओ विनम्र अवश्य छलाह किन्तु, कखनो झुकबा लेल तैयार नहि। परिस्थिति विशेष कँ आँकि मानवहित आ राष्ट्रहित मे ओ सहजहिं स्वयं कँ समायोजित करबा मे सक्षम व्यक्तित्व छलाह। हुनक खासियत छल जे ओ वर्तमान परिवेश मे जे किछु देशहित मे सही, उचित आ प्रासंगिक होइ, कहैत आ करैत छलाह । आक्रामक भेने बिना अपन सिद्धांत पर अटल रहब हुनक वैयक्तिक विशिष्टता छल। विनोदशीलता के बिना तऽ जेना ओ रहिये नहि सकैत छलाह । गंभीर सँ गंभीर विषय कँ अपन सहज वाणी द्वारा श्रोता केर मोन मे उतारि देबा मे हुनका जेना महारत हासिल छल। संभवतः इएह कारण जे हुनका सँ केओ जल्दी रूसैत नहि छल। ओ अपन मनमोहिनी अभिव्यक्ति सँ नहि केवल दोसरक गुण आ नीक काज कें बकायदा मान्यता दैत छलाह अपितु, राष्ट्रहित मे ओकर उपयोग करबा लेल सतत् तत्पर सेहो रहैत छलाह ।
ईहो कहब अतिश्योक्ति नहि जे वैश्विक क्षितिज पर एकटा निर्मल छवि सम्पन्न राजनेताक रूप मे अटलजी जखन सत्ताक बागडोर सम्हारलनि तऽ लगभग सब मोर्चा पर राष्ट्रीय आ अंतरराष्ट्रीय चुनौती देशक समक्ष मुँह बउने ठाढ़ छल । मुदा, अटल जीक सरकारक ठोस प्रयास पंजाब, कश्मीर घाटी, उत्तर-पूर्वी राज्य आ नक्सल प्रभावित राज्यक स्थिति में सम्यक सुधार आओल । अपवादक किछु छिट पुट घटना जँ छोड़ि देल जाय तँ हुनक कार्यकाल मे देश मे चहुँदिश साम्प्रदायिक सद्भाव कायम रहल। जतय जम्मू-कश्मीर मे सरकार द्वारा सुरक्षा संबंधी एहतियाती कार्यवाही कएल गेल ओतहि उत्तर-पूर्वी राज्य मे भटकल युवा केँ मुख्यधारा सँ जोड़बा लेल स्वस्थ वार्ता प्रक्रिया पर जोर देबाक नीति अपनाओल गेल । असगर असाम केर आंतरिक सुरक्षा संबंधी जरूरति लेल केन्द्र द्वारा लगभग एक अरब राशि स्वीकृत कएल गेल । अटल जी स्वयं नेशनल सोसलिस्ट काँसिल ऑफ नागालैंड संगठन केर नेता सँ वार्त्ता कऽ हुनका लोकनि कें शांतिक मार्ग पर आगू बढ़बा लेल प्रेरित कएलनि।
एहि में आश्चर्य नहि जे अटलजी जाहि सुराजक लक्ष्य कें हासिल करबाक गप्प कहैत छलाह ओकर अनिवार्य तत्व रूपेँ शांति आ सुरक्षाक संग समृद्धि, स्वास्थ्य, शिक्षा आ सामाजिक न्याय सेहो शामिल छल । एतबे नहि, आर्थिक नीति केँ अमल में अनबा लेल हुनका द्वारा कयल प्रयास मे कृषि, उद्योग आ व्यापारक क्षेत्र मे संतुलन कायम करबाक चेष्टा सेहो स्पष्ट रूप सँ दृष्टिगोचर होइत अछि । कृषि क्षेत्र लेल कएल गेल बजट आवंटन मे 58 प्रतिशत वृद्धि करब अपना आपमे एकटा कीर्तिमान अछि । रेल यातायात केँ विस्तारित करबा लेल अटलजी मई 1998 मे 760 किलोमीटर नम्हर कोंकण रेलवे परियोजना राष्ट्र केँ अर्पित कएलन्हि । भारतीय रेलवे केँ इंटरनेट सँ जोड़ब सेहो एकटा पैघ उपलब्धि रहलनि । ई अटल जीक दूरदर्शिताक अदम्य परिचायक अछि जे ओ विज्ञान आ तकनीकी ऊर्जा केर क्षेत्र मे युगांतरकारी उपलब्धि सेहो हासिल कएलनि । वर्ष 1998 मे पोखरण में पांचटा सफल भूमिगत नाभीकीय परीक्षण कएल गेल । कहबाक तात्पर्य जे राष्ट्र केँ स्वाभिमानी रूखि देनिहार अटल जी समाज केर सुरक्षा, समृद्धि आ सामाजिक न्याय केर मजगूत आधारशिला रखबा मे अपन ईमानदार मंशा केर प्रमाण सभ क्षेत्र मे देबा मे सर्वथा सक्षम साबित भेलाह ।
इहो कम महत्वपूर्ण नहि, जे अनेकता मे एकताक संगम अटलजीक व्यक्तित्वहि हुनक पहिचान छलनि । कखनहुँ हुनक कवि रूप मन मस्तिष्क पर मुखरित भऽ उठैत अछि तऽ कखनहुँ हुनक दार्शनिक रूप। कखनहुँ कठोर अनुशासन प्रिय शिक्षक रूप मे ओ नजरि अबैत छथि। तऽ कखनहुँ आज्ञाकारी कर्तव्यपरायण छात्रक रूप मे। एकटा योग्य राजनीतिज्ञ होयबाक प्रमाण जतय हुनका ‘सर्वश्रेष्ठ सांसद’ सन खिताब सँ प्राप्त भेलन्हि ओतहि जन-जन केर मानस पटल पर भारत रत्न होयबाक हुनक छवि कँ एहि सम्मान सँ प्रमाण भेटल । ओ सरिपहु भारतक अनमोल रत्न छलाह । उम्र केर अंतिम पड़ाव पर पहुंचलाक बादो हुनक यात्रा समाप्त नहि भेल। हुनकर व्यक्तित्व निखार थमबाक बजाय निरंतर चमकैत रहल। ओ नव-नव रूप गढ़ैत नव-नव लक्ष्य लऽ विकास-पथ पर सदति अग्रसर रहलाह। ठीक ओहि झरना सदृश जकर उद्देश्य होइत अछि – चलब, केवल चलब, जीवन भरि चलिते रहैत अछि । रूकि जायब, मरि जायब समान, निर्झर ई झर-झर कहैछ।
अटलजी भारत वर्षक जन-जन केँ अपना गरा लगाबय चाहैत छलाह। ओ देशमे एकटा एहेन रामराज्य केर स्थापना करय चाहैत छलाह, जतय सब सम्मान सँ जीबि सकय। इएह कारण छल जे भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जीक कार्यकाल मिथिला आ मैथिली केर सम्मान लेल सेहो स्वर्णिम रहल। खास कऽ मैथिली भाषा साहित्यक संवर्द्धन ओ संरक्षण केर निहितार्थ हुनका द्वारा लेल गेल अभूतपूर्व निर्णय। एहि लेल समस्त मिथिलावासी सतत् हुनक ऋणी रहत। मैथिली कँ भारतीय संविधानक आठम अनुसूची मे स्थान दऽ ओ जतय मिथिलावासीक आत्माक चिरलंबित पुकार कें आदर ओ सम्मान देलनि ओतहि यातायातक दृष्टिकोण सँ दू भाग मे बंटल मिथिला क्षेत्र कँ निर्मली मे रेल-सड़क कोसी महासेतुक निर्माणक उपहार देब हुनक दूरदृष्टिक परिचायक थीक। अटलजीक कीर्ति असीमित अछि तँ ओकरा शब्दक माला में गाँथब आसान नहि। अस्तु, नीचाक पांती सँ ओहि पुण्यात्मा केँ श्रद्धा-सुमन अर्पित करैत अपन लेखनी केँ विराम दैत छी –

‘अटल’ नाम छल ओहि योद्धा केर,
अटल बनल जीतल जे सब संग्राम !
हुनकर निष्ठा, हुनकर प्रियता
पसरि गेल छल जे गामे-गाम !!’

(लेखक राष्ट्रीय पत्रकारिता सँ जुड़ल छथि। संप्रति सी०एम०साइंस कालेज, दरभंगा मे आइक्यूएसी सहायक केर रूप मे कार्यरत छथि।)

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