
लहरि रूम (रांची) : आइ दिनाँक 10 अप्रैल क’ प्रातः काल 9 बजे झारखण्ड मैथिली मंच, रांची केँ सदस्य लोकनिक द्वारा रांची के महात्मा गाँधी मार्ग पर स्थित बाबा विद्यापति जी के प्रतिमा पर माल्यार्पण क’ हुनका सँ आज्ञा ल’ त्रिदिवसीय विद्यापति स्मृति पर्व समारोह 2026 केर शुभ आरम्भ कयल गेल। आजुक आयोजन मे परिचर्चा संग काव्य गोष्ठी झारखण्ड मैथिली मंच, रांची केँ कार्यालय विद्यापति दलान पर राखल गेल।

एकरऽ बाद विद्यापति दलान मे साहित्यिक कार्यक्रम के आयोजन कयल गेल । कार्यक्रमक मे तीन सत्र छल, एकटा उद्घाटन सत्र, एकटा साहित्यिक चर्चा, आ एकटा कविता संगोष्ठी । उद्घाटन सत्र कें शुभआरम्भ विद्यापति के चित्र पर विद्यानाथ झा विदित, डॉ. परवेज हसन, प्रमोद कुमार झा, आ मंच के अध्यक्ष बिनय कुमार झा महासचिव जयंत कुमार झा, आ अरुण कुमार झा के द्वारा पुष्पाजलि क’ दीप प्रज्वलित कय क’ कैल गेल।
पंडित सतीश कुमार मिश्र के द्वारा स्वस्तिवाचन के पाठ क’ संगहि शंखनाद सँ सम्पूर्ण दलान गुंजायमान भेल । पुनः मिथिला परंपरा के अनुरूप गोसोवणी गीत के सामूहिक गायन “जय जय भैरवी असुर भयुनी” आ राष्ट्रगान “जन गण मन” भेल | पाग आ दोपटा सँ अध्यक्ष विनय कुमार झा जी केँ द्वारा विशिष्ट अतिथि आ मंचासीन अतिथि लोकनि केँ स्वागत कयल गेल ।
तत्पश्चात उद्घाटन वक्ता डॉ. परवेज हसन मुख्यतः माँ जानकी के ताकत, बहादुरी, धैर्य, सहिष्णुता, अनुशासन आ गरिमामय जीवन पर चर्चा करैत अनेक अछूत पक्ष पर प्रकाश देलनि । साहित्यिक चर्चा मे बोकारो सँ आयल शैलजा झा महिला शक्ति पर केन्द्रित बहुत रास जानकारी देलनि । बोकारो स सेहो आयल शंभुनाथ झा मैथिली रंगकला पर प्रकाश देलनि । प्रमोद कुमार झा माँ सीता के चौतरफा गुण के चर्चा करैत हुनकर चरित्र के बारे मे बहुत रास चमत्कारी जानकारी साझा केलनि । डॉ. नरेन्द्र झा माँ सीताक विभिन्न रूपक विषय मे अविश्वसनीय मुदा सत्य तथ्यक उल्लेख अनेक उद्धरणक माध्यमे कयलनि । हितनाथ झा कालिदासक हमरे गामक छला आ मैथिली भाषा, साहित्य आ संस्कृति मे मिथिलाक उच्चैठ आ उज्जैनक इतिहास पर आधारित अनेक प्रामाणिक तथ्यक उल्लेख करैत दर्शक केँ विस्तृत जानकारी देलनि । अंत मे विद्यानाथ झा विदित मिथिलाक सामाजिक, सांस्कृतिक आ वैश्विक गरिमाक शिलान्यास जानकी विषय पर केन्द्रित संबोधन मे कहलनि जे विष्णुक प्रिय मास बैशाख मे माँ जानकीक पृथ्वी पर उपस्थिति अपने आप मे आध्यात्मिक तथ्य केँ सिद्ध करैत अछि। विदेह के राजा जनक के बेटी के रूप में जन्मना मात्र संयोग नै छै, बल्कि बहुत पुराण मे वर्णित तथ्य के शाब्दिक सत्यता के सिद्ध करै छै। संगहि अनेक प्रामाणिक तथ्यक उल्लेख क’ चर्चा सार्थक छल । त्रेतायुग मे मिथिला पवित्र भूमि के रूप मे जानल जाइत छल, जाहि कारणे माँ जानकी अपन मिथिला नाम लेलनि | एहि आयोजन मे मुख्य अतिथि डॉ. महुआ माजी अपन संबोधन मे माँ जानकीक सशक्त चरित्र केँ स्मरण करैत कतेको गहींर रहस्यक उल्लेख करैत कहलनि जे माँ जानकी एखनो प्रासंगिक आ अनुकरण योग्य छथि । आइ जँ युवती हुनक आदर्शक पालन करत तँ समाज बदलत। बंगला आ मैथिली भाषा आ संस्कृतिक समानताक संदर्भ दैत ओ कहलनि जे महाकवि विद्यापतिक प्रभाव गुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर पर सेहो पड़ल छल जे हुनक रचना मे स्पष्ट रूप सँ देखबा मे अबैत अछि । ओ कहलीह जे जखन कखनो राजनीति डगमगाए लगैत अछि तखन साहित्यकार लोकनि एकरा सम्भारैत छथि। मंच के संरक्षक अरुण कुमार झा के आग्रह पर झारखंड सरकार साहित्य अकादमी, ललित कला अकादमी आ संगीत आ नाट्य कला अकादमी के गठन के लेल मंत्रिमंडल पारित क’ देलक अछि।

स्वादिष्ट भोजनक बाद कवि सम्मेलन शुरू भेल जकर अध्यक्षता सिया राम झा ‘सरस’ केलनि आ मंच संचालन बद्रीनाथ झा केलनि ।
नंद किशोर महतो अतिथि लोकनिक स्वागत केलनि। सम्मेलन के शुभआरम्भ अंजू झा के ‘मूर्ति आ चूल्हा’ पर महिला के समर्पण पर कविता सँ भेल। युवा कवि प्रणव प्रियदर्शी गाम-शहर के वास्तविक स्थिति के चित्रण करय वाला कविता प्रस्तुत क’ वाहवाही जीतने छलाह.डा. आकांक्षा चौधरी नेनपन सीता के शिव के पिनाक उठौवति –मधु रानी एकटा सुंदर कबिता के पाठ कयलनि | जयंती मिश्रक कविता मे जीवन दर्शन आ आधुनिक वैश्विक स्थितिक सटीक चित्रण प्रस्तुत कयल गेल छल | रेणु झा द्वारा पति सँ विरह पर एकटा गीतक प्रस्तुति कयल गेल । पूनम बर्मा के कविता “ककर दोष” में इतिहास के चित्रण छल |
सरोज झा झारखंडी अपन कविता मे मिथिलाक झलक देलनि। हिन्दी के प्रख्यात कवि आ गीतकार कुमार विजयेन्द्र एकटा गजल आसमानो पै सितारों के कयी ठिकाने निकले, हर सांस परेशान है लेकिन कभी कभी आंखों में आसमान है लेकिन कभी कभी–भोजपुरी कविता ओकरा अंखिया में सपना हिलोर मारेला –तबे सुगवा पिंजरवा प ठोर मारेला के प्रस्तुति द’ सब श्रोता लोकनि कें मन मोहि लेलथि। पटना चेतना समिति के उमेश मिश्रा जी अपन कविता स दर्शक के मंत्रमुग्ध क देलखिन: “मैथिली सब लोक के भाषा अछि।”कविता झा एकटा सुन्दर कविता सुनौलनि: “आउ बैसु हमरा लग।”रुणा रश्मि जीक समकालीन कविता “युद्धक विभीषिका” मे वैश्विक स्थितिक सटीक चित्रण कयल गेल छल |
जम्मू के राष्ट्रीय स्तर केर कवि कमलेश भट्ट द्वारा अपन गजलक प्रस्तुति सभी का प्यार पाना चाहती है — मैं हिन्दू हूं मैं मुस्लिम हूं — सँ विद्यापति दलान वाहवाही सँ गुंजायमान भेल। शैलजा झा बजलीह – नारीक धन-सम्पत्तिक विरुद्ध विद्रोह करब हमर स्वभाव नहि अछि |
मधुबनी सँ आयल कवि आनंद मोहन झा अपन कविता कहवाक लूरि चाही,सभ उंच नीच चेखि क कहवाक लूरि चाही –बेहाल जनता नेहाल सत्ता ई लोक तंत्रक हाल देखू –, के प्रस्तुति सँ सब श्रोता सबके झुमय पर मजबूर क’ देलखिन।
आत्मेश्वर झा हमर गाम कविता प्रस्तुत क’ वर्तमान ग्रामीण परिवेश को जीवंत कयलनि । दिवाकर झा द्वारा चलू गाम मे घर बनाबी कविता के प्रस्तुति भेल
ककरो कनमा ककरो पौआ ककरो भेटय सेरक सेर– आदि समसामयिक समस्या मूलक वर्तमान राजनीति पर चोट करैत कविता सभक प्रस्तुति भेल ।
कौशल किशोर झा कें सुंदर कविता डा.कृष्ण मोहन झा द्वारा माता सीता को समर्पित कविता सँ श्रोता लोकनि मन्त्र मुग्ध भेला ।अध्यक्ष सिया राम झा सरस ने सरस गीतक प्रस्तुती सँ श्रोता लोकनि झुमय लगला। कार्यक्रमक अंत मे वरिष्ट सदस्य प्रेम चन्द्र झा ने धन्यवाद ज्ञापित कयलनि।


