
लहरि रूम (रांची ) : झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा सँ भोजपुरी, मगही, मैथिली, आ अंगिका केँ बाहर हेबा पर बढ़ैत आक्रोश कम हेबाक कोनो संकेत नहि देखा रहल अछि। जिलावार भाषा सूची सँ बाहर हेबा पर एहि भाषा -भाषी केँ लगातार विरोधक आलोक मे झारखंड सरकार एकटा उच्च स्तरीय समितिक गठन केलक। उच्च स्तरीय समिति के सदस्य द्वारा कयल गेल अनुशंसा सँ राज्य के सब मान्यता प्राप्त भाषा के सम्मानक आशा जागल अछि। झारखंड मैथिली भाषा संघर्ष समिति, के तरफ सँ सरकार केँ अहि प्रक्रिया पर धन्यवाद दैत आभार व्यक्त कयल गेल, कारण विगत कई वर्ष सँ समिति मैथिली भाषा के योजना नीति मे सम्मलित करबाक मांग क’ रहल अछि। राज्य केर सब जिला मे हस्ताक्षर अभियान चलाओल गेल आ लगभग 11000 हस्ताक्षर वाला आवेदन महामहिम राज्यपाल केँ सुपुर्द कयल गेल । झारखंड मे मैथिली के बारे मे जे प्रश्न उठी रहल अछि, एहि केँ संबंध मैथिली भाषा संघर्ष समिति केर झारखण्ड प्रदेश अध्यक्ष अमरनाथ झा अपन वक्तव्य दैत कहला जे 1928 मे लिखल जार्ज ग्रियर्सन केर “भारतीय भाषाई सर्वेक्षण” के अनुसार झारखंड केर देवघर, दुमका, साहेबगंज, पाकुर, आ गोड्डा जिला मे मैथिली भाषा बाजल जायत अछि । संगहि रांची, जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद, आ सरायकेला- खरसावां जिला मे मैथिली भाषी के संख्या एखन लाखों मे अछि. संगहि, देवघर, गोड्डा, आ दुमका सन संथाल जिला मे सेहो मैथिली भाषी केर उल्लेखनीय संख्या अछि ।

मैथिली भाषा संघर्ष समिति राज्य के यशस्वी आ ऊर्जावान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सँ मांग करैत अछि जे इंटर स्तर सँ विश्वविद्यालय स्तर तक पढ़ाओल जाय वाला प्राचीन भाषा मैथिली के झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा मे सम्मलित क’ सम्मानित कयल जाय। अमरनाथ झा कहलनि मैथिली भाषा संविधान केर अष्टम अनुसूची संग राज्य झारखंड केर द्वितीय राजभाषा सूचि मे सेहो सम्मलित अछि , अतः मैथिली भाषा योजना नीति मे शामिल करबाक चाही।

