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Sunday, February 1, 2026
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Homeझारखण्ड विधानसभा चुनाव 2024झारखंडमे आदिवासी जनसंख्यामे गिरावट, जनसांख्यिकीमे परिवर्तन लोकतंत्रक लेल खतरा : बाबूलाल मरांडी

झारखंडमे आदिवासी जनसंख्यामे गिरावट, जनसांख्यिकीमे परिवर्तन लोकतंत्रक लेल खतरा : बाबूलाल मरांडी

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राँची/ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी एक बेर फेर संथाल परगनाक बदलैत जनसांख्यिकी पर राज्य सरकार पर हमला केलनि। मरांडी आइ मानसून सत्रक पहिल दिन विधानसभा परिसरमे समाचार मीडियाकेँ अपन बात सं अवगत करवैत छलाह।

मरांडी कहलनि जे पूरा राज्यमे आदिवासीक जनसंख्या लगातार घटि रहल अछि। संथाल परगना क्षेत्रक जनसांख्यिकीमे अप्रत्याशित परिवर्तन भेल अछि। जनसांख्यिकीक ई परिवर्तन लोकतंत्रक लेल खतरा अछि। जे सबके लेल चिन्ताक विषय अछि।

ओ कहलनि जे एहि परिवर्तनमे जँ कोनो समुदाय सबसँ बेसी प्रभावित भेल अछि तँ ओ आदिवासी समाज अछि। १९५१ आ २०११क जनगणना रिपोर्टक आधार पर प्रकाशित आंकड़ाक हवाला दैत ओ कहलनि जे १९५१ मे झारखण्डमे आदिवासीक जनसंख्या ३६ प्रतिशत, सनातनी हिन्दू ८७.९ प्रतिशत आ मुसलमानक जनसंख्या ८.९ प्रतिशत छल। २०११ मे जनजातीय जनसंख्या बढ़ि कऽ २६ प्रतिशत, मुसलमान १४.५ प्रतिशत आ सनातनी ८१.१७ प्रतिशत भऽ गेल। अर्थात आदिवासी घटल, सनातनी घटल आ मुसलमान बढ़ल।

संथाल परगनाक आंकड़ा दैत ओ कहलनि जे एहिठामक स्थिति खतराक घंटी पर पहुँचि गेल अछि। अईठाम चिंताजनक स्थिति अछि। आंकड़ा दैत ओ कहलनि जे १९५१ मे संथाल परगनामे आदिवासीक जनसंख्या ४४.६७ प्रतिशत, मुसलमान ९.४४ प्रतिशत आ अन्य ४५.९ प्रतिशत छल, जखन कि २०११ मे आदिवासीसभक जनसंख्या घटि कऽ २८.११ प्रतिशत आ मुसलमानक जनसंख्या बढ़ि कऽ २२.७३ प्रतिशत भऽ गेल। आन बढ़ि के 49.2 प्रतिशत भए गेलइ।

ओ कहलनि जे ई आंकड़ा स्पष्ट रूपसँ जनसांख्यिकीमे पैघ बदलावक संकेत दऽ रहल अछि। एतबे नहि, भाजपा द्वारा हाल मे कैल गेल मतदाता सर्वेक्षण के आंकड़ा पर विचार करब त संथाल परगना के 10 विधानसभा क्षेत्र मे 2019 सँ 2024 तक मतदाता सूची मे प्रत्येक बूथ पर मतदाता संख्या 20 सँ 123 प्रतिशत तक बढ़ल अछि।

ओ कहलनि जे भाजपा चुनाव आयोग लग सेहो गेल अछि, ज्ञापन देलक अछि आ जाञ्चक माँग कयलक अछि। मरांडी कहलनि जे देशक संवैधानिक व्यवस्थामे जनसंख्याक आनुपातिक अनुपातक अनुसार लोकसभा, विधानसभा चुनाव आ नौकरीमे अनुसूचित जनजाति अनुसूचित जातिक लेल आरक्षण देल गेल अछि। एहि लेल आदिवासीक जनसंख्यामे कमीक कारण जनसांख्यिकी मात्र नहि बदलि रहल अछि बल्कि आरक्षण प्रतिशतमे सेहो कमी आबय पड़त। सबसं बेसी नुकसान आदिवासी समाज के होएत।

ओ कहलनि जे ओ मुख्यमंत्रीकेँ पत्र लिखि घटैत जनसंख्याक कारणक जाँच करबाक लेल एसआईटीक गठनक माँग कयलनि अछि। मुख्यमंत्री के पहल करबाक चाही आ कार्रवाई करबाक चाही।

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