
लहरि रूम (रांची) : विश्वविद्यालय पंचांग आ हिन्दू (सनातन) पंचांग केर समय गणना सूर्य आ चन्द्रमा दुनू कें गति पर निर्भर अछि। सामान्यतः एक वर्ष मे 12 मास होइत अछि। मुदा कोनो कोनो साल वर्ष भरिक संख्या मे अधिकता आबि जाइत छैक। अधिकता माने 13टा मास भ’ जाइत छैक। प्रत्येक खगोलीय घटना कें सामान्य बनेबाक लेल गणना काल मे एहि मासक जुड़ाव खगोलशास्त्री लोकनिक द्वारा जोडल जाइत अछि। मैथिली मे एहि मास कें ‘मलमास’ कहल गेल अछि। ई कोनो सामान्य घटना नहि थिक आ ने एकरा अशुभ मानल जाइत अछि , अपितु ऋतु , पाबनि आ समय कें संतुलन बना क’ रखबाक लेल एकटा ई गणक सबहक आवश्यक प्रक्रिया छनि। जखन चन्द्रमा आओर सूर्य के गति मे एकरूपता नहि रहैत छनि जाहि कारण सँ हुनक समय चक्र मे विसंगति उत्पन्न होइत छनि तखन एहि विसंगति केँ दूर करबाक लेल पंचांग मे एकटा अतिरिक्त मास जोडल जाइत अछि। मिथिला छोड़ि आन ठाम अधिक मास संग पुरषोत्तम मास के रूप मे सेहो देखल जाइत अछि।

धार्मिक आ सांस्कृतिक महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार मलमास अत्यंत शुभ आ पवित्र मानल जाइत अछि | एकरा पुरुषोत्तम मास सेहो कहल गेल अछि कारण ई भगवान विष्णु के समर्पित अछि आ विशेष सद्गुणी मानल जाइत अछि | पारम्परिक मान्यताक अनुसार एहि मास मे कयल गेल पूजा, भक्ति, जप, दान, आ सेवाक फल गुणा-भाग होइत अछि | एहि दौरान भक्त भगवान विष्णु के समर्पित मंत्र के जाप करैत छथि, धार्मिक ग्रंथ के पाठ करैत छथि, पवित्र स्नान करैत छथि, आ आध्यात्मिक शांति आ भक्ति बढ़ाबय लेल दान दैत छथि | धार्मिक परंपरा के अनुसार एहि मास मे मिठाई बाटनाइ , सेवा करब, गाछ रोपब, आ गरीब के मदद करब कतेको साल तक एकर फल भेटैत अछि |
की अधिक मास मे शुभ आयोजन होइत अछि ?
भगवान विष्णु केँ समर्पित मलमास के अंत्यंत शुभ आ फलदायी मानल जाइत अछि, मुदा धार्मिक मान्यता कें अनुसार एहि कालखंड मे विवाह, गृहप्रवेश, नामकरण संस्कार आ अन्य शुभ आयोजन पर रोक अछि | मलमास मुख्य रूप सँ धार्मिक अभ्यास, आत्मचिंतन, आ आध्यात्मिक प्रगति के लेल समर्पित अछि । शुभ-शुभ समय आ अन्य पारिवारिक आयोजन एहि मासक बाद मात्र निर्धारित होइत अछि । जेना-जेना मलमास समाप्त होइत अछि, धार्मिक पंचांग सामान्य मास आ शुभ समय मे वापस आबि जाइत अछि ।

