
लहरि रूम (नई दिल्ली) : संसद केँ लोकसभा मे पिछला किछु दिन सँ जारी हंगामा के बीच आई बुधदिन ध्वनी मत सँ ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’यानी एंटी पेपर लीक बिल के नाम सं सेहो जानल जाइत अछि, के पारित क देल गेल। सदन के कार्यवाही के दौरान सत्ताधारी एनडीए आओर विपक्ष के बीच भयंकर हंगामा मचि गेल छल. मुदा आइ-काल्हि लोक सभ सोचि रहल हेतु जे इ ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’यानी एंटी पेपर लीक बिल कानून की अछि, ई कोना काज करत, आओर जे दोषी पाओल गेला हुनका संगे की हेतनि।

पेपर लीक बिल कानून के उद्देश्य की अछि?
केंद्र सरकार पेपर लीक आ परीक्षा में धांधलीसँ मुकाबला करबा लेल कईटा कदम उठेलक अछि। ई पारित विधेयक के उद्देश्य “सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधन के रोकथाम) अधिनियम, 2024” मे संशोधन करनाइ अछि । संशोधन के उद्देश्य कड़ा कानूनी प्रावधान के माध्यम सँ परीक्षा प्रणाली मे पारदर्शिता आ ईमानदारी बढेनाइ , संग-संग छात्रऽ केर भविष्य कोना सुरक्षित होइन ताहि केर सेहो सुनिश्चित करबाक अछि ।
पेपर लीक बिल कानून की अछि?
लोक परीक्षा (अनुचित साधन रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 के प्रावधान के अनुसार प्रश्नपत्र लीक करय या परीक्षा मे अनुचित साधन के प्रयोग करय के दोषी पाओल गेल व्यक्ति के न्यूनतम 5 साल आ अधिकतम 10 साल के जेल, आ ₹50 लाख तक के जुर्माना के सजा देल जा सकैत अछि।
पेपर लीक बिल कानून के तहत की सजा भेटत?
पीएम मोदी के नेतृत्व वाला केंद्र सरकार द्वारा पेश करल गेल नया कानून मँ संगठित अपराध मँ न्यूनतम सात साल के जेल आरू ₹10 करोड़ तक के जुर्माना के प्रस्ताव अछि । प्रस्तावित संशोधन कें तहत दू मास कें भीतर सबटा जांच पूरा भ’ जेबाक चाही। एहि विधेयक मे राज्य आ केंद्र शासित प्रदेश कें फास्ट ट्रैक कोर्ट क स्थापना करबाक निर्देश सेहो देल गेल अछि। ई अदालत आरोप पत्र दाखिल करला के तीन महीना के भीतर मुकदमा के प्रक्रिया पूरा करत।

